Monday, January 9, 2012

राष्ट्र-किंकर के संस्कृति सम्मान समारोह में सम्मानित हुए हम सब साथ साथ के सदस्य

नई दिल्ली। बरसात, ओले के बाद जबरदस्त ठण्ड के बावजूद यहां देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में पधारे विद्वानों ने संस्कृति को समाज का प्राण बताते हुए उसे और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। अवसर था साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र-किंकर द्वारा आयोजित संस्कृति सम्मान समारोह का। समारोह के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. जी.वी.जी.कृष्णामूर्ति ने संस्कृति सम्मान प्रदान करते हुए विदेशी दासता से विरुद्ध जनमानस के जनून की चर्चा करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण सुनाते हुए ‘यस सर’ के बदले ‘जयहिन्द’ कहने पर स्कूल में दंडित होने, बाल्यकाल में अंग्रेजी पुलिस की लाठियां खाने का उल्लेख किया। डॉ. कृष्णामूर्ति ने अपनी संस्कृति पर गौरव अनुभव करते हुए कठिन से कठिन चुनौती का सहजता से सामना करने का श्रेय बाल्यकाल के संस्कारों को दिया। उन्होंने युवाओं विशेष रूप से बढ़ते बच्चों पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया। श्री विनोद बब्बर द्वारा संचालित समारोह की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध़ वैदिक विद्वान डा सुंदरलाल कथूरिया ने की। विशिष्ट अतिथि संस्कृत के प्रकांड विद्वान डॉ. रमाकान्त शुक्ल, दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी के सदस्य स.सुरजीत सिंह जोबन, आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री, प्रैस कोसिल के सदस्य श्री के.डी.चंदोला तथा समाजसेवी श्री परमानंद अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक बताते हुए भाषा, पर्यावरण और संस्कृति  के संरक्षण पर बल दिया।  इससे पूर्व दिल्ली प्रदेश गायत्री परिवार की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के संयोजक श्री खैराती लाल सचदेवा द्वारा दीपयज्ञ व रेड रोज पब्लिक स्कूल के छात्रों द्वारा वंदेमातरम् के पश्चात श्री अम्बरीश कुमार ने देश के कोने से कोने से पधारे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने मकर संक्रांति के ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व, भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण की प्रतीक्षा, स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस, मुक्तसर पंजाब के गुरु गोविंद सिंह से जुड़े प्रसंगों की चर्चा भी की।
हर वर्ष मकर-संक्रांति के अवसर प्रदान किए जाने वाले संस्कृति सम्मान आचार्य डॉ. राधागोविंद थोंड़ाम, डॉ.अरुणा राजेन्द्र शुक्ल, डॉ. शामलाल, श्री अब्दुर्रज्जाक मायूस सागरी, डॉ. प्रमेन्द्र प्रियदर्शी, श्री अमरेन्दर कुमार, श्री ओमप्रकाश त्रेहन, श्री राजकिशोर, श्री मधुकर शैदाई, डॉ. भैरुलाल गर्ग, को प्रदान किये गये। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में सर्वाधिक भागीदारी के लिए मोहन गार्डन के कमल मॉडल स्कूल, हस्तसाल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा सर्वाेदय कन्या विद्यालय को भी यह सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अनेक विद्वानों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सारस्वत सम्मान भी प्रदान किये गये।। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी काव्य रचनाओं से समा बांधने वालों में सर्वश्री सागर सूद, रशीद सैदपुरी, नंदलाल रसिक, घमंडीलाल अग्रवाल, मुसाफिर देहलवी, फरहत जमा खान, ऋतिक गुप्त दर्पण, एम.एस.तोमर ‘विरही’, डा. महेन्द्रपाल काम्बोज, डा. लालजी सहाय श्रीवास्तव, डा.शमीम देवबंदी, डॉ. सादिक, डा. चन्द्रसेन, अरुण कुमार ‘अजीब’ प्रमुख थे। कार्यक्रम का एक आकर्षण बालक आशुतोष द्वारा पणिनी अष्टाध्यायी का सस्वर कंठस्थ पाठ भी रहा। आशुतोष की प्रतिभा से खचाखच भरा सभागार आनंदित हो उठा।  धन्यवाद ज्ञापन श्री धर्मेन्द्र गर्ग किया।
इसी समारोह में विक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ की ओर से सुप्रसिद्ध हिन्दी सेवी एवम् संस्कृतिकर्मी  किशोर श्रीवास्तव तथा कवयित्री सुषमा भंडारी (हम सब साथ साथ के सदस्यों) को विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि भी प्रदान की गई.

Sunday, January 8, 2012

निम्बार्क शोध संस्थानम् द्वारा हम सब साथ साथ के सदस्यों का सम्मान
हिम्मत नगर। गुजरात की इस नगरी में निम्बार्क शोध संस्थानम् द्वारा आयोजित दो दिवसीय संस्कृत-हिन्दी संगोष्ठी में देश के विभिन्न से पधारे विद्वानों ने राष्ट्रीय एकता में राष्ट्रभाषा के योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम संयोजक एवं संस्थान के अध्यक्ष स्वामी डाण् गौरांगशरण देवाचार्य ने अपने उद्बोधन में संस्कृत को विश्व भाषा बताते हुए भारतीय भाषाओं पर संस्कृत के प्रभाव की चर्चा की। मुख्य अतिथि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री केण् जीण् वंजारा ने संस्कृत को संस्कृति का आधार बाताते हुए चर्चा के विषय ष्संस्कृत साहित्य में नारी संवेदनाष् पर अपने विचार प्रकट किये। विकासशील जातीय कल्याणए गुजरात राज्य के निदेशक श्री वंजारा ने गीता के श्लोकों को उद्धृत करते हुए संस्कृत विद्वानों का अभिनन्दन किया। मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री के सलाहकार रहे डा. सोमदत्त दीक्षित ने संस्कृत के विभिन्न ग्रन्थों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नारी संवेदना और संस्कृत साहित्य का पूरक सिद्ध किया।
     इस अवसर पर डा. योगिनी पटेल, डा. हर्षा पटेल, डा. व्यास, डा. राकेश जोशी सहित अनेक विद्वानों ने अपने आलेख प्रस्तुत किये। इस अवसर पर संस्कृत की रक्षा करने के लिए डा. दीक्षित को निम्बार्क देववाणी दधिचि सम्मान प्रदान किया। उन्हें पुष्प गुच्छए शाल, प्रशस्ति पत्र तथा 5100 रुपये की राशि भेंट की गई। प्रथम दिवस विभिन्न कालेज के प्राचार्यों, छात्रों एवं बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमियों ने भी भाग लिया।
     द्वितीय दिवस ’बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिन्दीष्’् को समर्पित था। वक्ताओं में गुरूनानक विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. हरमहेन्द्र सिंह बेदी, राष्ट्रकिंकर संपादक. विनोद बब्बर, कापड़िया महिला कालेज, भावनगर की हिन्दी विभाग अध्यक्ष डा. सुमन शर्मा, जूनागढ़ आर्ट कॉलेज के कालेज विभागाध्यक्ष डा. कान्ति भाई चौटालिया भी शामिल थे। वक्ताओं ने राष्ट्रभाषा के सम्मान की चर्चा करते हुए इसके अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। इस अवसर अहिन्दी भाषी होते हुए भी हिन्दी के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित निम्बार्क राष्ट्र सम्मान डा. हरमहेन्द्र सिंह बेदी को दिया गया। उन्हें ग्यारह हजार की नकद राशिए प्रशस्ति पत्र,  शाल आदि भेंट किया गया। श्रेष्ठ कृति सम्मान विनोद बब्बर के यात्रा वृतांत ‘इब्सन के देश में’ को दिया गया। सर्वाधिक लम्बी हिन्दी गज़ल के विश्वरिकार्ड धारी गोला गोकरणनाथ के डा. मधुकर शैदाई तथा पटियाला के सागर सूद को निम्बार्क गज़ल शिरोमणि सम्मान में नकद राशि, शाल, शील्ड अर्पित कर कृतज्ञता ज्ञापित की गई। अनेक अन्य सम्मान भी प्रदान किये गये।
     इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भाग लेने वालों में सागर सूद, मधुकर शैदाई, इरफान राही भी शामिल थे।
     इस अवसर पर आयोजित सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार और गुदगुदाने वाले पोस्टरों की किशोर श्रीवास्तव कृत ‘खरी-खरी’ कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी को भी लोगों ने खूब सराहा। किशोर श्रीवास्तव द्वारा मंच पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने हिम्मत नगर के सहकार हाल में उपस्थित सैंकड़ों नागरिकों तथा विभिन्न भागों से आये हिन्दी प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा के कारण उन्हें ‘निम्बार्क सांस्कृतिक राजदूत सम्मान’ से नवाजा गया।

Monday, December 5, 2011

भ्रष्टाचार पर केंद्रित अंक हेतु रचनाएं आमंत्रित:

हम सब साथ साथ पत्रिका के भ्रष्टाचार पर केंद्रित अगले अंक हेतु रचनाकार अपनी श्रेष्ठ अप्रकाशित रचनाएं (गीत, कविता, कहानी, लघुकथा व व्यंग्य आदि) अपने फोटो, परिचय सहित 20 दिसंबर,2011 तक भेजने का कष्ट करें। इस पत्रिका के विचार विमर्श स्तंभ हेतु आप ‘क्यों हैं हम जन्म से मृत्यु तक भ्रष्टाचार ढोने को विवश’ पर अपने संक्षिप्त विचार भी फोटो सहित भेज सकते हैं। 
ईमेल-humsabsathsath@gmail.com, hsss2004@indiatimes.com

Monday, November 21, 2011

गोवा में मिला ‘हम सब साथ साथ’ के सदस्यों को सम्मान


गोवा। पिछले दिनों कर्नाटक की प्रसिद्ध शैक्षिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था शिक्षक विकास परिषद ने ज्ञानदीप मंडल एवं शिक्षक विकास प्रतिष्ठान के साथ मिलकर गोवा में 17वें राष्ट्रीय शैक्षिक सम्मेलन का 2 दिवसीय आयोजन किया। इस आयोजन की मुख्य अतिथि थीं दिल्ली निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. राज बुद्धिराजा। अन्य विशिष्ट अतिथियों में सर्वश्री पांडुरंग नाइक, मोहन नाइक, डॉ दिवाकर गौर, विजय पंडित,  डॉ. विजयेन्द्र शर्मा, डॉ. आर. एल. शिवहरे आदि शामिल रहे। सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र में अनेक वक्ताओं ने अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। संस्था के अध्यक्ष श्री आर. वी. कुलकर्णी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की गतिविधियों का परिचय दिया। इस सम्मेलन में कला प्रदर्शनी, शैक्षिक विचार-विमर्श एवं विभिन्न सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यक्रमों का सुदर व भव्य आयोजन किया गया। इसमें ढेर सारे स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में देश के दूर दराज क्षेत्रों से पधारी विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक, शैक्षिक व सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किया गया। इसमें जहाँ लाइफ टाइम अचीवमेंट राष्ट्रीय अवार्ड से डॉ. राज बुद्धिराजा को सम्मानित किया गया वहीं हम सब साथ साथ के सदस्यों सर्वश्री अखिलेश द्धिवेदी अकेला (दिल्ली) व डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा (राजस्थान) को राष्ट्रीय साहित्य भूषण तथा डॉ. दिवाकर दिनेश गौड़ (गुजरात) को राष्ट्रीय शिक्षक भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मेलन के दौरान हम सब साथ साथ के सदस्यों सर्वश्री  नमिता राकेश (फरीदाबाद) व किशोर श्रीवास्तव ( दिल्ली ) को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
                                                                                                      रपटः इरफान सैफी राही, नई दिल्ली

Thursday, November 3, 2011

हम सब साथ साथ बाल, युवा एवं वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान योजना-2012 हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित

हम सब साथ साथ सदस्य परिवार के प्रत्येक आयु वर्ग की प्रतिभाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप उचित मंच एवं मान देने के उद्देश्य से निः शुल्क आयोजित नीचे लिखे सम्मानों हेतु हम सब साथ साथ सदस्य परिवार में शामिल व्यक्तियों/उनके 15 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों से नीचे लिखे आयु वर्ग के अनुसार प्रविष्टियां आमंत्रित हैंः 1, बाल प्रतिभा पुरस्कार (8 से 15 आयु वर्ग) यह पुरस्कार कविता लेखन, नृत्य, कैरीकेचर, गायन, चित्रकारी आदि क्षेत्रों के उन बहुमुखी प्रतिभा के धनी बच्चों के लिए है, जिन्होंने अपने स्कूल/जिले/राज्य आदि के आयोजनों में उपर्युक्त विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कम से कम 5 स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किये हों 2, युवा प्रतिभा सम्मान (16 से 45 आयु वर्ग)ः यह पुरस्कार ऐसे युवा साहित्यकारों/कलाकारों के लिए है जोे विगत कम से कम पॉंच वर्षों से लेखन या कला के किसी क्षेत्र से जुड़े हों और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने या मंच पर अपनी कला के प्रदर्शन के साथ ही अपने स्कूल, कालेज या शहर/राज्य आदि की संस्थाओं द्वारा लेखन, वाद विवाद, गीत-संगीत, नृत्य या अन्य किसी प्रतियोगिताओं आदि के माध्यम से सम्मानित या पुरस्कृत हुए हों। इसके लिए प्रतिभागी अपनी श्रेष्ठता प्रमाणित करने या दावे के समर्थन में अपनी प्रकाशित/अप्रकाशित श्रेष्ठ रचनाएं या कला की सीडी आदि प्रेषित करें 3, वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान (45 वर्ष से ऊपर के सदस्यों के लिए)ः इस सम्मान हेतु उन प्रतिभाओं के नाम पर विचार किया जाएगा जिनका साहित्य, संगीत या कला/समाज सेवा के किसी क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का उल्लेखनीय/उत्कृष्ट योगदान होगा और जिनकी कला को जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हो। इस सम्मान हेतु उनके प्रकाशित साहित्य/पुस्तकों/कार्यक्रमों की सीडी को भी संज्ञान में लिया जाएगा  4, लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड (60 वर्ष और उससे ऊपर आयु वर्ग के लिए)ः यह विशिष्ट/सर्वोच्च सम्मान वरिष्ठ सदस्यों की जीवनपर्यन्त (कम से कम 20 वर्ष की लगातार सेवा) की विशिष्ट उपलब्धियों के लिए है, विशेषकर ऐसे सदस्यों के लिए जिन्होंने लेखन, संगीत या कला के विभिन्न अन्य क्षेत्रों में बढ़ती उम्र के बावजू़द लगातार सक्रिय रहते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी हो।  
नोटः 1, प्रतिभागी, सदस्यता क्रमांक सहित अपना पूर्ण विवरण, 2 पासपोर्ट आकार के फोटो, (बाल/वरिश्ठ प्रतिभा व लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु प्राप्त महत्त्वपूर्ण प्रमाणपत्रों आदि की फोटो प्रतियॉं भी संलग्न करें), आयु प्रमाण पत्र एवं अन्य वांछित जानकारी यदि कोई हो, टिकट लगे एवं  पते लिखे 2 पोस्टकार्ड, 1 जवाबी लिफाफे के साथ प्रेषित करें 2, सभी चयनित प्रतिभागियों को ख्याति प्राप्त साहित्यकारों, संपादकों एवं कलाकारों आदि की उपस्थिति एवं आतिथ्य में गरिमामयी कार्यक्रम में आमन्त्रित कर उनकी प्रतिभा के अनुरूप आकर्षक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं पुस्तकें (60 वर्ष से ऊपर की वरिष्ठ प्रतिभाओं को श्री फल, अंग वस्त्र सहित) आदि उपहार स्वरूप प्रदान की जायेंगी 3, कार्यक्रम में भाग लेने वाले बाहरी प्रतिभागियों के आवास, भोजन की सामान्य/घरेलू व्यवस्था प्रतिभागियों के चाहेनुसार हससासा द्वारा की जा सकती है 4, इस पुरस्कार योजना में एक ही श्रेणी में वे प्रतिभागी दोबारा भाग नहीं ले सकेंगे, जो पहले उसी श्रेणी में सम्मानित हो चुके हैं या एक सम्मान पा चुके सदस्य कम से कम 10 वर्ष बाद ही दूसरी श्रेणी का सम्मान पाने के पात्र होंगे  5, उपर्युक्त सम्मान योजना में चयनित प्रतिभागियों को सम्मान समारोह के समय मंच पर अपनी श्रेष्ठ प्रतिभा का प्रदर्शन भी करना होगा 6, बाल प्रतिभा सम्मान योजना के अंतर्गत प्रविष्टियां जिले के किसी प्रमुख व्यक्ति या स्कूल/कालेज/संस्थान के प्रधानाचार्य/  प्रमुख की टिप्पणी के साथ प्रेषित की जा सकती हैं  बाल प्रतिभा सम्मान हेतु वही बच्चे पात्र होंगे जो स्वयं या जिनके अभिभावक हम सब साथ साथ पत्रिका परिवार से पिछले लगातार पॉंच वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़े होंगे या 15 अप्रैल, 2012 तक/या इससे पूर्व इसके आजीवन सदस्य होंगे। इसी प्रकार से युवा प्रतिभा सम्मान, वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान/लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु सदस्य का स्वयं हम सब साथ साथ से पिछले लगातार 5 वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़ा होना या 15 अप्रैल, 2012  तक/या इससे पूर्व इसका आजीवन सदस्य होना ज़रूरी है 7, सम्मान हेतु चयन के समय भेजी गई पुरस्कारों या सम्मानों की सूची के अलावा प्रतिभागी के कला/साहित्यिक योगदान को विशेष तवज्जो दिया जाएगा। केवल सदस्य होने मात्र से ही कोई व्यक्ति किसी सम्मान का पात्र नहीं होगा, उसकी प्रतिभा सर्वोपरि होगी 8, अपनी प्रविश्टि स्वयं भेजने के अलावा पाठकगण किसी अन्य सदस्य की प्रविष्टि को भी नियमानुसार विचारार्थ प्रेषित कर सकते हैं। अंतिम तिथिः प्रविष्टियॉं हम सब साथ साथ के कार्यालय में 15 अप्रैल, 2012 तक पहॅंुच जानी चाहिए।


हम सब साथ साथ पत्रिका का शुल्क दरः एक प्रतिः 15 रु. पत्रिका एवं पत्रिका के कला परिवार सहित शुल्क- वार्षिकः- 150 रु. पॉंच वर्षीयः 650 रु. आजीवनः  1200 रु. (10 वर्ष) संरक्षक सदस्यः 2100 रु. हम सब साथ साथ को विनिमय आधार पर नियमित रूप से अपनी पत्र/पत्रिकायें भेजने वाले संपादकों के लिए पांच वर्षीय शुल्क 350 रु. व आजीवन शुल्क 650 रु.
पताः संयोजक (सम्मान योजना), हम सब साथ साथ पत्रिका, 916- बाबा फरीदपुरी, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली-110008 मो. 9868709348 8447673015 ईमेलः humsabsathsath@gmail.com, hsss2004@indiatimes.com

Thursday, October 13, 2011

अरुण श्रीवास्तव ‘मुन्ना जी’ नहीं रहे....

हम सब साथ साथ के सहयोगी प्रकाशन, झांसी से प्रकाशित होने वाली कायस्थ
 समाज की लोकप्रिय पत्रिका ‘चित्रांश ज्योति’ के संस्थापक व प्रकाशक झांसी
 निवासी श्री अरुण श्रीवास्तव ‘मुन्ना जी’ का गत् 5 अक्तूबर, 2011 को लखनऊ
 स्थित मेडिकल कालेज में एक बीमारी के चलते आकस्मिक निधन हो गया। वह 52
 वर्ष के थे। अपने पीछे वह पत्नी सहित दो नाबालिग बच्चे छोड़ गए हैं। आप
 लगभग तीन दशकों तक दैनिक जागरण, झांसी के संपादकीय विभाग में कार्य करते
 हुए बतौर लेखक मुख्यतः 70-90 के दशक में रेडियो के अलावा दैनिक जागरण
 सहित धर्मयुग, लोटपोट, बाल भारती, दीवाना तेज, पराग, फिल्मी दुनिया,
माधुरी आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे थे। विभिन्न
पत्र/पत्रिकाओं में प्रकाशित ‘आपके अटपटे प्रश्न और मुन्नाजी के चटपटे
उत्तर’ आपका लोकप्रिय स्तंभ रहा था। इस स्तंभ के अंतर्गत पाठकों के अटपटे
प्रश्नों के जवाब में आपके चटपटे व काव्यात्मक उत्तर उस समय बेहद
 लोकप्रिय रहे थे। आपने किशोरावस्था में ही लेखन व पत्रकारिता शुरू कर दी
 थी और उसी समय आपने ‘मृगपाल’ नामक एक मासिक पत्रिका का संपादन भी
 प्रारम्भ कर दिया था। आपको लेखन व पत्रकारिता के अलावा गायन व समाज सेवा
 का भी शौक था। आपने झांसी जिले में कायस्थ समाज के उत्थान के लिए भी अनेक
 कार्यक्रम आयोजित किए और अंतिम समय तक कायस्थ समाज की पत्रिका ‘चित्रांश
 ज्योति’ का प्रकाशन भी करते रहे। आपको विभिन्न उल्लेखनीय कार्यों के चलते
 अनेक सम्मान भी प्राप्त थे। आप अत्यन्त मिलनसार व सामाजिक प्रकृति के
 व्यक्ति थे। आपके आकस्मिक निधन से आपके हजारों चाहने वाले दुखी व स्तब्ध
 हैं।

Thursday, September 15, 2011

‘हम सब साथ साथ’ के अनेक सदस्यों को मिला पंचवटी राष्ट्रभाषा सम्मान





नई दिल्ली। यहां पंचवटी लोकसेवा समिति (पंजीकृत) द्वारा ं हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के पश्चात राष्ट्र-भाषा हिन्दी के संवर्द्धन में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 11 विद्वानों एवं सी.बी.एस.ई. की परीक्षा में 90 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 50 से अधिक छात्रों को सम्मानित किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति के भाषा सलाहकार रहे डॉ. परमानंद पांचाल, विशिष्ट अतिथि हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष रहे प्रो. नित्यानंद पाण्डेय एवं अध्यक्ष थे विवेकानंद मिशन के संचालक स्वामी विवेक भारती तथा पंचवटी लोकसेवा समिति के संरक्षक श्री अम्बरीश कुमार। समारोह के दौरान राष्ट्रभाषा हिंदी की उत्कृष्ट सेवा के लिए जिन लोगों को सम्मानित किया गया उनमें ‘हम सब साथ साथ’ पत्रिका परिवार के सदस्यों सर्वश्री बीकानेर के अशफाक कादरी, मेरठ के शिवानंद सिंह सहयोगी, दिल्ली की शोभा रस्तोगी, अशोक कुमार, भवानीमंडी के राजेश पुरोहित एवं वाराणसी की डॉ. प्रेरणा दुबे सहित पदमश्री डॉ. रविन्द्र कुमार, सोनीपत हिन्दू कालेज के डीन. प्रो. ओमीश परुथी, अमलनेर, महाराष्ट्र के डॉ. सुरेश महेश्वरी,, असम विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. शुभदा पाण्डेय  के नाम उल्लेखनीय हैं। इस अवसर पर देवबंद के पत्रकार श्री ओमवीर सिंह को पत्रकार गौरव-सम्मान भी प्रदान किया गया।

समारोह में बोलते हुए मुख्य अतिथि डॉ. परमानंद पांचाल ने राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति हमारी निक्रियता तथा अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार तथा आम जनता से हिन्दी के विकास पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने पंचवटी लोकसेवा समिति द्वारा राष्ट्रभाषा  को प्रोत्साहित करने की सराहना करते हुए सभी सम्मानित छात्रों एवं साहित्यकारों के प्रति अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। विशिष्ट अतिथि प्रो. नित्यानंद पाण्डेय ने भाषा के लिए सभी को आत्मचिंतन की सलाह दी तो अध्यक्षता कर रहे  स्वामी विवेक भारती ने 11 सितम्बर को आचार्य विनोबा भावे की जयन्ती, अमेरिका में ट्विन टावर विनाश, के साथ-साथ स्वामी विवेकानंद जी द्वारा शिकागों में किये गये उद्घोष दिवस की जानकारी देते हुए सभी से हिन्दी में ही हस्ताक्षर करने का संकल्प लेने का आह्वान किया तो समारोह में उपस्थित सैंकड़ों हिन्दी प्रेमियों ने करतल ध्वनि से उनका अनुसरण करने की पुष्टि की।  इस अवसर पर डॉ. विनोद बब्बर के सद्य प्रकाशित कहानी संग्रह ’फटा कोट’ तथा श्री चंदुलाल भदौरिया के काव्य संग्रह ‘सरसपान’ तथा ‘अर्पित श्रद्धा-अर्पित स्वर’ का लोकार्पण भी किया गया।

कविसम्मेलन का आगाज गीतकार नंदलाल ‘रसिक’ के सुमधुर स्वर से हुआ जिसमें श्री अमरेन्दर कुमार, डॉ. चन्द्रसेन (हिन्दी अकादमी), श्री सत्यदेव हरियाणी, श्री विनोद बंसल, श्री जितेन्द्र कुमार, श्री प्रद्युम्मन, प्रो. ओमीश परुथी सहित अनेक कवियों ने हिन्दी तथा हिन्दुस्तान का महिमागान करते हुए अपनी श्रेष्ठ रचनाएं सुनाई तो श्री किशोर श्रीवास्तव द्वारा गीतमय मिमिक्री कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। 
-रपटः लाल बिहारी लाल, नई दिल्ली