हम सब साथ साथ पत्रिका के मई-जून, 2012 अंक हेतु सारगर्भित व चिंतन-मनन योग्य उत्कृष्ट प्रकाशन सामग्री (मुद्दा, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, कविताएं आदि) आमंत्रित हैं। इसी अंक के विचार-विमर्श स्तंभ हेतु ‘संयुक्त परिवार: लाभ या हानि’ विषय पर सारगर्भित विचार गद्य (250 शब्दों में, या पद्य -150 शब्दों में) पासपोर्ट आकार के साफ फोटोग्राफ सहित प्रेषित करें। ‘हम सब साथ साथ’ को पहली बार अपनी रचनाएं भेजते समय कृपया अपना परिचय व पासपोर्ट आकार का फोटोग्राफ अवश्य भेजें। रचनाएं डाक व ईमेल किसी भी माध्यम् से भेजी जा सकती हैं। अंतिम तिथिः 30 मार्च, 2012। निर्णय की सूचना या रचना की वापसी हेतु जवाबी पोस्टकार्ड/लिफाफा संलग्न किया जा सकता है। पताः संपादक-हम सब साथ साथ पत्रिका, 916, बाबा फरीदपुरी, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली-110008 मो. 9868709348 एवं 8447673015
Monday, March 12, 2012
Tuesday, February 21, 2012
महाराष्ट्र के नांदेड़ में संपन्न हुआ अ. भा. लेखक सम्मेलन/हम सब साथ साथ के सदस्य हुए सम्मानित
नांदेड, महाराष्ट्र। दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी एवं अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक संघ के संयुक्त तत्त्वावधान में महान साहित्यकार, चिंतक, समाज सुधारक गुरु गोविंद सिंह महाराज की कर्मभूमि नांदेड में आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय लेखक सम्मेलन में देशभर से पधारे विद्वानों ने हिन्दी को एकता के सूत्र में बांधने वाली शक्ति बताते हुए इसके अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया गया। स्वामी रामानंद तीर्थ विश्वविद्यालय के सायन्स कॉलेज के
भव्य सभागार में विभिन्न सत्रों में चर्चा, कवि सम्मेलन, किशोर कृत ‘‘खरी-खरी’’ कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी, तथा सम्मान समारोह के दौरान बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय लेखक, पत्रकार, अध्यापक, शोध छात्र तथा हिन्दीप्रेमी लगातार उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र में गुरुद्वारा हजूर साहिब सचखंड के मुख्यग्रन्थी प्रतापसिंह की उपस्थिति में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एवं पूर्व सांसद लेखक स. हरविंदर सिंह हंसपाल, कालेज अध्यक्ष डा. व्यंकटेश काब्दे, हिन्दी अकादमी के उपसचिव डा. हरिसुमन बिष्ट, प्राचार्य डा. जी.एम.कलमसे तथा संस्था के अध्यक्ष डॉ. हरमहेन्दर सिंह बेदी ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारम्भ किया। स्थानीय संयोजिका सायन्स कालेज हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अरुणा राजेन्द्र शुक्ल ने गुरु गोविंद सिंह के साथ निजाम के अत्याचारी शासन के विरूद्ध संघर्ष करने वाले, क्षेत्र के मुक्तिदाता के रूप में स्थापित स्वामी रामानंद तीर्थ को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। हजूर साहिब सचखंड के मुख्यग्रन्थी ने गुरुजी की अंतिम कर्मभूमि नांदेड़ के विषय में अनेक ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी वहीं स. हंसपाल एवं अन्य सभी वक्ताओं ने हिन्दी और गुरुगोविंद सिंह के साहित्य दर्शन को राष्ट्रीय एकता का पर्याय बताया। संयोजक सुरजीत सिंह जोबन ने देश के विभिन्न भागों से पधारे साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
चायकाल के बाद जानेमाने कवि महेन्द्र शर्मा द्वारा संचालित कवि सम्मेलन का आगाज देवबंद के डा. महेन्द्रपाल काम्बोज के ओजस्वी स्वर में गुरुजी की यशोगान से हुआ। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में सर्वश्री हर्षकुमार, नरेन्द्रसिंह होशियार पुरी, मनोहर देहलवी, किशोर श्रीवास्तव, विनोद बब्बर, डा. रामनिवास मानव, डा.कीर्तिवर्द्धन, अतुल त्रिपाठी, ओमप्रकाश हयारण दर्द, डा.अहिल्या मिश्र, डा. अरुणा शुक्ल, संतोष टेलवीकर, ज्योति मुंगल, संगमलाल भंवर, डा. हरिसुमन बिष्ट आदि ने राष्ट्रीय एकता के विभिन्न रंग बिखेरे।
द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में हजूर साहिब के मुख्य कथाकार ज्ञानी अमरसिंह की उपस्थिति में ‘गुरु गोविंदसिंह और उनका साहित्य साहित्य’ विषय पर परिचर्चा के दौरान अमृतसर के नानकदेव विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष रहे डॉ. हरमहेन्दर सिंह बेदी ने गुरुजी रचित ‘विचित्र नाटक’ को प्रथम आत्मकथा बताया। डा. बेदी के अनुसार गुरुजी ने अपने जन्म स्थान पटना से आनंदपुर और फिर दक्षिण भारत तक के सम्पूर्ण क्षेत्र को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए तलवार उठाई वहीं साहित्यिक समृद्धि के लिए कलम का सहारा भी लिया। अपने अल्प जीवन में ही महान कार्य करने वाले गुरुजी जुझारू योद्धा ही नहीं अनेक भाषाओं के विद्वान भी थे। अन्य वक्ताओं में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी शिक्षण केन्द्र शिमला की अध्यक्षा प्रो.जोगेश कौर, इन्दौर के डॉ. प्रताप सिंह सोढ़ी, हैदराबाद की अहिल्या मिश्र, नांदेड़ की एम.ए. की छात्रा श्रीमती पूनम शुक्ल तथा डा. परमेन्दर कौर भी शामिल थे। इसी सत्र में स. सुरजीत सिंह जोबन के अभिनंदन ग्रन्थ ‘खुश्बु बन कर जिऊंगा’ की प्रथम प्रति संपादक डा. रामनिवास मानव ने मंच पर विराजमान अतिथियों को भेंट कर लोकार्पण करने का आग्रह किया। तत्पश्चात डा. अरुणा राजेन्द्र शुक्ल के शोधग्रन्थ ‘नरेश मेहता के उपन्यासों में व्यक्त अवदान’ का लोकार्पण किया गया। इस सत्र का संचालन राष्ट्र-किंकर के संपादक श्री विनोद बब्बर ने किया।
भोजनोपरान्त द्वितीय सत्र में ‘अहिन्दीभाषी प्रदेशों का हिन्दी लेखन’ विषय पर परिचर्चा में मुख्य वक्ता विनोद बब्बर ने हिन्दुस्तान की आजादी के 65 वर्ष बाद भी यहाँ अहिन्दीभाषी शब्द के प्रयोग को अपमानजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसके लिए सरकारों की ढुलमुल नीति को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने मातृभाषा और राष्ट्रभाषा को दोनों आंखें बताते हुए इनमें संतुलन की आवश्यकता बताई लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इन दोनों आँखों पर पट्टी बांधने तथा तीसरी आँख (अंग्रेजी) को प्रभावी बनाने के प्रयास हो रहे हैं जबकि तीसरा नेत्र विनाश का सूचक है। इस सत्र में डा.हरि सिंह पाल, डा.शहाबुद्दीन शेख, डा.रेखा मोरे, डा.ज्योति टेलवेकर ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। चायपान के बाद के सत्र में कवि सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आये कवियों ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं से वातावरण को हिन्दी कवितामय बनाया।
तीसरे दिन के प्रथम सत्र में क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री ओमप्रकाश पोकार्णा ने नांदेड की पवित्र भूमि पर सभी का स्वागत करते हुए सम्मेलन को राष्ट्रीय एकता का महाकुम्भ घोषित किया। विधायक महोदय ने हिन्दी के प्रति समर्पण के लिए स. सुरजीत सिंह जोबन तथा विनोद बब्बर को सम्मानित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान की प्रशंसा की। इसी सत्र में
‘अंतर्राज्यीय भाषायी संवाद’ विषय पर हिन्दी अकादमी के उपसचिव डा. हरिसुमन बिष्ट ने मुख्य वक्ता के रूप में आदिकाल से आधुनिक काल तक के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम व बाद में राष्ट्रभाषा बनने तक हिन्दी की राष्ट्रीय पहचान को रेखांकित करते हुए आज के वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी को सम्पूर्ण राष्ट्र की आवश्यकता बताया। डा. बिष्ट के अनुसार राष्ट्रभाषा, सम्पर्क भाषा, आम बोलचाल की भाषा हिन्दी ही है इसीलिए यह हम सभी को एकसूत्रता में पिरोती है। डा. रामनिवास मानव की अध्यक्षता एवं डा. अरूणा के संचालन में डॉ. बेदी, आकाशवाणी दिल्ली के पुर्व राजभाषा निदेशक डा.कृष्ण नारायण पाण्डेय, डा. मान, डा. रमा येवले प्रमुख वक्ता थे।
अंतिम सत्र में स. हंसपाल, डा. बेदी नांदेड़ एजुकेशन सो. के उपाध्यक्ष श्र सदाशिवराव पाटिल, प्राचार्य डा. कलमसे ने विद्वानों को ‘भाषा रत्न’ सम्मान प्रदान कर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।
नांदेड़ से दिल्ली लौटते हुए सचखंड एक्सप्रेस के वातानुकुलित डिब्बे में कविगोष्ठी तथा डा. हरिसुमन विष्ट के उपन्यास अछनी-बछनी के कुछ अंशों का वाचन तथा समीक्षा संवाद आयोजित किये गये। इस नवप्रयोग की संकल्पना डा. रामनिवास मानव ने प्रस्तुत की जिसमें 25 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न प्रतिभागियों सहित हम सब साथ साथ की ज्योति गजभिये को साहित्य सम्मान, विनोद बब्बर एवं किशोर श्रीवास्तव को भाषा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
चायकाल के बाद जानेमाने कवि महेन्द्र शर्मा द्वारा संचालित कवि सम्मेलन का आगाज देवबंद के डा. महेन्द्रपाल काम्बोज के ओजस्वी स्वर में गुरुजी की यशोगान से हुआ। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में सर्वश्री हर्षकुमार, नरेन्द्रसिंह होशियार पुरी, मनोहर देहलवी, किशोर श्रीवास्तव, विनोद बब्बर, डा. रामनिवास मानव, डा.कीर्तिवर्द्धन, अतुल त्रिपाठी, ओमप्रकाश हयारण दर्द, डा.अहिल्या मिश्र, डा. अरुणा शुक्ल, संतोष टेलवीकर, ज्योति मुंगल, संगमलाल भंवर, डा. हरिसुमन बिष्ट आदि ने राष्ट्रीय एकता के विभिन्न रंग बिखेरे।द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में हजूर साहिब के मुख्य कथाकार ज्ञानी अमरसिंह की उपस्थिति में ‘गुरु गोविंदसिंह और उनका साहित्य साहित्य’ विषय पर परिचर्चा के दौरान अमृतसर के नानकदेव विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष रहे डॉ. हरमहेन्दर सिंह बेदी ने गुरुजी रचित ‘विचित्र नाटक’ को प्रथम आत्मकथा बताया। डा. बेदी के अनुसार गुरुजी ने अपने जन्म स्थान पटना से आनंदपुर और फिर दक्षिण भारत तक के सम्पूर्ण क्षेत्र को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए तलवार उठाई वहीं साहित्यिक समृद्धि के लिए कलम का सहारा भी लिया। अपने अल्प जीवन में ही महान कार्य करने वाले गुरुजी जुझारू योद्धा ही नहीं अनेक भाषाओं के विद्वान भी थे। अन्य वक्ताओं में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी शिक्षण केन्द्र शिमला की अध्यक्षा प्रो.जोगेश कौर, इन्दौर के डॉ. प्रताप सिंह सोढ़ी, हैदराबाद की अहिल्या मिश्र, नांदेड़ की एम.ए. की छात्रा श्रीमती पूनम शुक्ल तथा डा. परमेन्दर कौर भी शामिल थे। इसी सत्र में स. सुरजीत सिंह जोबन के अभिनंदन ग्रन्थ ‘खुश्बु बन कर जिऊंगा’ की प्रथम प्रति संपादक डा. रामनिवास मानव ने मंच पर विराजमान अतिथियों को भेंट कर लोकार्पण करने का आग्रह किया। तत्पश्चात डा. अरुणा राजेन्द्र शुक्ल के शोधग्रन्थ ‘नरेश मेहता के उपन्यासों में व्यक्त अवदान’ का लोकार्पण किया गया। इस सत्र का संचालन राष्ट्र-किंकर के संपादक श्री विनोद बब्बर ने किया।
तीसरे दिन के प्रथम सत्र में क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री ओमप्रकाश पोकार्णा ने नांदेड की पवित्र भूमि पर सभी का स्वागत करते हुए सम्मेलन को राष्ट्रीय एकता का महाकुम्भ घोषित किया। विधायक महोदय ने हिन्दी के प्रति समर्पण के लिए स. सुरजीत सिंह जोबन तथा विनोद बब्बर को सम्मानित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान की प्रशंसा की। इसी सत्र में
अंतिम सत्र में स. हंसपाल, डा. बेदी नांदेड़ एजुकेशन सो. के उपाध्यक्ष श्र सदाशिवराव पाटिल, प्राचार्य डा. कलमसे ने विद्वानों को ‘भाषा रत्न’ सम्मान प्रदान कर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।
नांदेड़ से दिल्ली लौटते हुए सचखंड एक्सप्रेस के वातानुकुलित डिब्बे में कविगोष्ठी तथा डा. हरिसुमन विष्ट के उपन्यास अछनी-बछनी के कुछ अंशों का वाचन तथा समीक्षा संवाद आयोजित किये गये। इस नवप्रयोग की संकल्पना डा. रामनिवास मानव ने प्रस्तुत की जिसमें 25 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न प्रतिभागियों सहित हम सब साथ साथ की ज्योति गजभिये को साहित्य सम्मान, विनोद बब्बर एवं किशोर श्रीवास्तव को भाषा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
Monday, January 9, 2012
राष्ट्र-किंकर के संस्कृति सम्मान समारोह में सम्मानित हुए हम सब साथ साथ के सदस्य
नई दिल्ली। बरसात, ओले के बाद जबरदस्त ठण्ड के बावजूद यहां देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में पधारे विद्वानों ने संस्कृति को समाज का प्राण बताते हुए उसे और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। अवसर था साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र-किंकर द्वारा आयोजित संस्कृति सम्मान समारोह का। समारोह के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. जी.वी.जी.कृष्णामूर्ति ने संस्कृति सम्मान प्रदान करते हुए विदेशी दासता से विरुद्ध जनमानस के जनून की चर्चा करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण सुनाते हुए ‘यस सर’ के बदले ‘जयहिन्द’ कहने पर स्कूल में दंडित होने, बाल्यकाल में अंग्रेजी पुलिस की लाठियां खाने का उल्लेख किया। डॉ. कृष्णामूर्ति ने अपनी संस्कृति पर गौरव अनुभव करते हुए कठिन से कठिन चुनौती का सहजता से सामना करने का श्रेय बाल्यकाल के संस्कारों को दिया। उन्होंने युवाओं विशेष रूप से बढ़ते बच्चों पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया। श्री विनोद बब्बर द्वारा संचालित समारोह की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध़ वैदिक विद्वान डा सुंदरलाल कथूरिया ने की। विशिष्ट अतिथि संस्कृत के प्रकांड विद्वान डॉ. रमाकान्त शुक्ल, दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी के सदस्य स.सुरजीत सिंह जोबन, आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री, प्रैस कोसिल के सदस्य श्री के.डी.चंदोला तथा समाजसेवी श्री परमानंद अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक बताते हुए भाषा, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया। इससे पूर्व दिल्ली प्रदेश गायत्री परिवार की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के संयोजक श्री खैराती लाल सचदेवा द्वारा दीपयज्ञ व रेड रोज पब्लिक स्कूल के छात्रों द्वारा वंदेमातरम् के पश्चात श्री अम्बरीश कुमार ने देश के कोने से कोने से पधारे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने मकर संक्रांति के ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व, भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण की प्रतीक्षा, स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस, मुक्तसर पंजाब के गुरु गोविंद सिंह से जुड़े प्रसंगों की चर्चा भी की।
हर वर्ष मकर-संक्रांति के अवसर प्रदान किए जाने वाले संस्कृति सम्मान आचार्य डॉ. राधागोविंद थोंड़ाम, डॉ.अरुणा राजेन्द्र शुक्ल, डॉ. शामलाल, श्री अब्दुर्रज्जाक मायूस सागरी, डॉ. प्रमेन्द्र प्रियदर्शी, श्री अमरेन्दर कुमार, श्री ओमप्रकाश त्रेहन, श्री राजकिशोर, श्री मधुकर शैदाई, डॉ. भैरुलाल गर्ग, को प्रदान किये गये। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में सर्वाधिक भागीदारी के लिए मोहन गार्डन के कमल मॉडल स्कूल, हस्तसाल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा सर्वाेदय कन्या विद्यालय को भी यह सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अनेक विद्वानों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सारस्वत सम्मान भी प्रदान किये गये।। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी काव्य रचनाओं से समा बांधने वालों में सर्वश्री सागर सूद, रशीद सैदपुरी, नंदलाल रसिक, घमंडीलाल अग्रवाल, मुसाफिर देहलवी, फरहत जमा खान, ऋतिक गुप्त दर्पण, एम.एस.तोमर ‘विरही’, डा. महेन्द्रपाल काम्बोज, डा. लालजी सहाय श्रीवास्तव, डा.शमीम देवबंदी, डॉ. सादिक, डा. चन्द्रसेन, अरुण कुमार ‘अजीब’ प्रमुख थे। कार्यक्रम का एक आकर्षण बालक आशुतोष द्वारा पणिनी अष्टाध्यायी का सस्वर कंठस्थ पाठ भी रहा। आशुतोष की प्रतिभा से खचाखच भरा सभागार आनंदित हो उठा। धन्यवाद ज्ञापन श्री धर्मेन्द्र गर्ग किया।
इसी समारोह में विक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ की ओर से सुप्रसिद्ध हिन्दी सेवी एवम् संस्कृतिकर्मी किशोर श्रीवास्तव तथा कवयित्री सुषमा भंडारी (हम सब साथ साथ के सदस्यों) को विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि भी प्रदान की गई.
हर वर्ष मकर-संक्रांति के अवसर प्रदान किए जाने वाले संस्कृति सम्मान आचार्य डॉ. राधागोविंद थोंड़ाम, डॉ.अरुणा राजेन्द्र शुक्ल, डॉ. शामलाल, श्री अब्दुर्रज्जाक मायूस सागरी, डॉ. प्रमेन्द्र प्रियदर्शी, श्री अमरेन्दर कुमार, श्री ओमप्रकाश त्रेहन, श्री राजकिशोर, श्री मधुकर शैदाई, डॉ. भैरुलाल गर्ग, को प्रदान किये गये। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में सर्वाधिक भागीदारी के लिए मोहन गार्डन के कमल मॉडल स्कूल, हस्तसाल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा सर्वाेदय कन्या विद्यालय को भी यह सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अनेक विद्वानों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सारस्वत सम्मान भी प्रदान किये गये।। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी काव्य रचनाओं से समा बांधने वालों में सर्वश्री सागर सूद, रशीद सैदपुरी, नंदलाल रसिक, घमंडीलाल अग्रवाल, मुसाफिर देहलवी, फरहत जमा खान, ऋतिक गुप्त दर्पण, एम.एस.तोमर ‘विरही’, डा. महेन्द्रपाल काम्बोज, डा. लालजी सहाय श्रीवास्तव, डा.शमीम देवबंदी, डॉ. सादिक, डा. चन्द्रसेन, अरुण कुमार ‘अजीब’ प्रमुख थे। कार्यक्रम का एक आकर्षण बालक आशुतोष द्वारा पणिनी अष्टाध्यायी का सस्वर कंठस्थ पाठ भी रहा। आशुतोष की प्रतिभा से खचाखच भरा सभागार आनंदित हो उठा। धन्यवाद ज्ञापन श्री धर्मेन्द्र गर्ग किया।
इसी समारोह में विक्रम शिला हिन्दी विद्यापीठ की ओर से सुप्रसिद्ध हिन्दी सेवी एवम् संस्कृतिकर्मी किशोर श्रीवास्तव तथा कवयित्री सुषमा भंडारी (हम सब साथ साथ के सदस्यों) को विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि भी प्रदान की गई.
Sunday, January 8, 2012
निम्बार्क शोध संस्थानम् द्वारा हम सब साथ साथ के सदस्यों का सम्मान
हिम्मत नगर। गुजरात की इस नगरी में निम्बार्क शोध संस्थानम् द्वारा आयोजित दो दिवसीय संस्कृत-हिन्दी संगोष्ठी में देश के विभिन्न से पधारे विद्वानों ने राष्ट्रीय एकता में राष्ट्रभाषा के योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम संयोजक एवं संस्थान के अध्यक्ष स्वामी डाण् गौरांगशरण देवाचार्य ने अपने उद्बोधन में संस्कृत को विश्व भाषा बताते हुए भारतीय भाषाओं पर संस्कृत के प्रभाव की चर्चा की। मुख्य अतिथि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री केण् जीण् वंजारा ने संस्कृत को संस्कृति का आधार बाताते हुए चर्चा के विषय ष्संस्कृत साहित्य में नारी संवेदनाष् पर अपने विचार प्रकट किये। विकासशील जातीय कल्याणए गुजरात राज्य के निदेशक श्री वंजारा ने गीता के श्लोकों को उद्धृत करते हुए संस्कृत विद्वानों का अभिनन्दन किया। मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री के सलाहकार रहे डा. सोमदत्त दीक्षित ने संस्कृत के विभिन्न ग्रन्थों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नारी संवेदना और संस्कृत साहित्य का पूरक सिद्ध किया।इस अवसर पर डा. योगिनी पटेल, डा. हर्षा पटेल, डा. व्यास, डा. राकेश जोशी सहित अनेक विद्वानों ने अपने आलेख प्रस्तुत किये। इस अवसर पर संस्कृत की रक्षा करने के लिए डा. दीक्षित को निम्बार्क देववाणी दधिचि सम्मान प्रदान किया। उन्हें पुष्प गुच्छए शाल, प्रशस्ति पत्र तथा 5100 रुपये की राशि भेंट की गई। प्रथम दिवस विभिन्न कालेज के प्राचार्यों, छात्रों एवं बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमियों ने भी भाग लिया।
द्वितीय दिवस ’बदलते वैश्विक परिदृश्य में हिन्दीष्’् को समर्पित था। वक्ताओं में गुरूनानक विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. हरमहेन्द्र सिंह बेदी, राष्ट्रकिंकर संपादक. विनोद बब्बर, कापड़िया महिला कालेज, भावनगर की हिन्दी विभाग अध्यक्ष डा. सुमन शर्मा, जूनागढ़ आर्ट कॉलेज के कालेज विभागाध्यक्ष डा. कान्ति भाई चौटालिया भी शामिल थे। वक्ताओं ने राष्ट्रभाषा के सम्मान की चर्चा करते हुए इसके अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। इस अवसर अहिन्दी भाषी होते हुए भी हिन्दी के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित निम्बार्क राष्ट्र सम्मान डा. हरमहेन्द्र सिंह बेदी को दिया गया। उन्हें ग्यारह हजार की नकद राशिए प्रशस्ति पत्र, शाल आदि भेंट किया गया। श्रेष्ठ कृति सम्मान विनोद बब्बर के यात्रा वृतांत ‘इब्सन के देश में’ को दिया गया। सर्वाधिक लम्बी हिन्दी गज़ल के विश्वरिकार्ड धारी गोला गोकरणनाथ के डा. मधुकर शैदाई तथा पटियाला के सागर सूद को निम्बार्क गज़ल शिरोमणि सम्मान में नकद राशि, शाल, शील्ड अर्पित कर कृतज्ञता ज्ञापित की गई। अनेक अन्य सम्मान भी प्रदान किये गये।
इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भाग लेने वालों में सागर सूद, मधुकर शैदाई, इरफान राही भी शामिल थे।
इस अवसर पर आयोजित सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार और गुदगुदाने वाले पोस्टरों की किशोर श्रीवास्तव कृत ‘खरी-खरी’ कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी को भी लोगों ने खूब सराहा। किशोर श्रीवास्तव द्वारा मंच पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने हिम्मत नगर के सहकार हाल में उपस्थित सैंकड़ों नागरिकों तथा विभिन्न भागों से आये हिन्दी प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा के कारण उन्हें ‘निम्बार्क सांस्कृतिक राजदूत सम्मान’ से नवाजा गया।
Monday, December 5, 2011
भ्रष्टाचार पर केंद्रित अंक हेतु रचनाएं आमंत्रित:
हम सब साथ साथ पत्रिका के भ्रष्टाचार पर केंद्रित अगले अंक हेतु रचनाकार अपनी श्रेष्ठ अप्रकाशित रचनाएं (गीत, कविता, कहानी, लघुकथा व व्यंग्य आदि) अपने फोटो, परिचय सहित 20 दिसंबर,2011 तक भेजने का कष्ट करें। इस पत्रिका के विचार विमर्श स्तंभ हेतु आप ‘क्यों हैं हम जन्म से मृत्यु तक भ्रष्टाचार ढोने को विवश’ पर अपने संक्षिप्त विचार भी फोटो सहित भेज सकते हैं।
ईमेल-humsabsathsath@gmail.com, hsss2004@indiatimes.com
Monday, November 21, 2011
गोवा में मिला ‘हम सब साथ साथ’ के सदस्यों को सम्मान
गोवा। पिछले दिनों कर्नाटक की प्रसिद्ध शैक्षिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था शिक्षक विकास परिषद ने ज्ञानदीप मंडल एवं शिक्षक विकास प्रतिष्ठान के साथ मिलकर गोवा में 17वें राष्ट्रीय शैक्षिक सम्मेलन का 2 दिवसीय आयोजन किया। इस आयोजन की मुख्य अतिथि थीं दिल्ली निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. राज बुद्धिराजा। अन्य विशिष्ट अतिथियों में सर्वश्री पांडुरंग नाइक, मोहन नाइक, डॉ दिवाकर गौर, विजय पंडित, डॉ. विजयेन्द्र शर्मा, डॉ. आर. एल. शिवहरे आदि शामिल रहे। सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र में अनेक वक्ताओं ने अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। संस्था के अध्यक्ष श्री आर. वी. कुलकर्णी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की गतिविधियों का परिचय दिया। इस सम्मेलन में कला प्रदर्शनी, शैक्षिक विचार-विमर्श एवं विभिन्न सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यक्रमों का सुदर व भव्य आयोजन किया गया। इसमें ढेर सारे स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में देश के दूर दराज क्षेत्रों से पधारी विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक, शैक्षिक व सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किया गया। इसमें जहाँ लाइफ टाइम अचीवमेंट राष्ट्रीय अवार्ड से डॉ. राज बुद्धिराजा को सम्मानित किया गया वहीं हम सब साथ साथ के सदस्यों सर्वश्री अखिलेश द्धिवेदी अकेला (दिल्ली) व डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा (राजस्थान) को राष्ट्रीय साहित्य भूषण तथा डॉ. दिवाकर दिनेश गौड़ (गुजरात) को राष्ट्रीय शिक्षक भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मेलन के दौरान हम सब साथ साथ के सदस्यों सर्वश्री नमिता राकेश (फरीदाबाद) व किशोर श्रीवास्तव ( दिल्ली ) को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
रपटः इरफान सैफी राही, नई दिल्लीThursday, November 3, 2011
हम सब साथ साथ बाल, युवा एवं वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान योजना-2012 हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित
हम सब साथ साथ सदस्य परिवार के प्रत्येक आयु वर्ग की प्रतिभाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप उचित मंच एवं मान देने के उद्देश्य से निः शुल्क आयोजित नीचे लिखे सम्मानों हेतु हम सब साथ साथ सदस्य परिवार में शामिल व्यक्तियों/उनके 15 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों से नीचे लिखे आयु वर्ग के अनुसार प्रविष्टियां आमंत्रित हैंः 1, बाल प्रतिभा पुरस्कार (8 से 15 आयु वर्ग) यह पुरस्कार कविता लेखन, नृत्य, कैरीकेचर, गायन, चित्रकारी आदि क्षेत्रों के उन बहुमुखी प्रतिभा के धनी बच्चों के लिए है, जिन्होंने अपने स्कूल/जिले/राज्य आदि के आयोजनों में उपर्युक्त विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कम से कम 5 स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किये हों 2, युवा प्रतिभा सम्मान (16 से 45 आयु वर्ग)ः यह पुरस्कार ऐसे युवा साहित्यकारों/कलाकारों के लिए है जोे विगत कम से कम पॉंच वर्षों से लेखन या कला के किसी क्षेत्र से जुड़े हों और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने या मंच पर अपनी कला के प्रदर्शन के साथ ही अपने स्कूल, कालेज या शहर/राज्य आदि की संस्थाओं द्वारा लेखन, वाद विवाद, गीत-संगीत, नृत्य या अन्य किसी प्रतियोगिताओं आदि के माध्यम से सम्मानित या पुरस्कृत हुए हों। इसके लिए प्रतिभागी अपनी श्रेष्ठता प्रमाणित करने या दावे के समर्थन में अपनी प्रकाशित/अप्रकाशित श्रेष्ठ रचनाएं या कला की सीडी आदि प्रेषित करें 3, वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान (45 वर्ष से ऊपर के सदस्यों के लिए)ः इस सम्मान हेतु उन प्रतिभाओं के नाम पर विचार किया जाएगा जिनका साहित्य, संगीत या कला/समाज सेवा के किसी क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का उल्लेखनीय/उत्कृष्ट योगदान होगा और जिनकी कला को जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हो। इस सम्मान हेतु उनके प्रकाशित साहित्य/पुस्तकों/कार्यक्रमों की सीडी को भी संज्ञान में लिया जाएगा 4, लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड (60 वर्ष और उससे ऊपर आयु वर्ग के लिए)ः यह विशिष्ट/सर्वोच्च सम्मान वरिष्ठ सदस्यों की जीवनपर्यन्त (कम से कम 20 वर्ष की लगातार सेवा) की विशिष्ट उपलब्धियों के लिए है, विशेषकर ऐसे सदस्यों के लिए जिन्होंने लेखन, संगीत या कला के विभिन्न अन्य क्षेत्रों में बढ़ती उम्र के बावजू़द लगातार सक्रिय रहते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी हो।
नोटः 1, प्रतिभागी, सदस्यता क्रमांक सहित अपना पूर्ण विवरण, 2 पासपोर्ट आकार के फोटो, (बाल/वरिश्ठ प्रतिभा व लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु प्राप्त महत्त्वपूर्ण प्रमाणपत्रों आदि की फोटो प्रतियॉं भी संलग्न करें), आयु प्रमाण पत्र एवं अन्य वांछित जानकारी यदि कोई हो, टिकट लगे एवं पते लिखे 2 पोस्टकार्ड, 1 जवाबी लिफाफे के साथ प्रेषित करें 2, सभी चयनित प्रतिभागियों को ख्याति प्राप्त साहित्यकारों, संपादकों एवं कलाकारों आदि की उपस्थिति एवं आतिथ्य में गरिमामयी कार्यक्रम में आमन्त्रित कर उनकी प्रतिभा के अनुरूप आकर्षक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं पुस्तकें (60 वर्ष से ऊपर की वरिष्ठ प्रतिभाओं को श्री फल, अंग वस्त्र सहित) आदि उपहार स्वरूप प्रदान की जायेंगी 3, कार्यक्रम में भाग लेने वाले बाहरी प्रतिभागियों के आवास, भोजन की सामान्य/घरेलू व्यवस्था प्रतिभागियों के चाहेनुसार हससासा द्वारा की जा सकती है 4, इस पुरस्कार योजना में एक ही श्रेणी में वे प्रतिभागी दोबारा भाग नहीं ले सकेंगे, जो पहले उसी श्रेणी में सम्मानित हो चुके हैं या एक सम्मान पा चुके सदस्य कम से कम 10 वर्ष बाद ही दूसरी श्रेणी का सम्मान पाने के पात्र होंगे 5, उपर्युक्त सम्मान योजना में चयनित प्रतिभागियों को सम्मान समारोह के समय मंच पर अपनी श्रेष्ठ प्रतिभा का प्रदर्शन भी करना होगा 6, बाल प्रतिभा सम्मान योजना के अंतर्गत प्रविष्टियां जिले के किसी प्रमुख व्यक्ति या स्कूल/कालेज/संस्थान के प्रधानाचार्य/ प्रमुख की टिप्पणी के साथ प्रेषित की जा सकती हैं बाल प्रतिभा सम्मान हेतु वही बच्चे पात्र होंगे जो स्वयं या जिनके अभिभावक हम सब साथ साथ पत्रिका परिवार से पिछले लगातार पॉंच वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़े होंगे या 15 अप्रैल, 2012 तक/या इससे पूर्व इसके आजीवन सदस्य होंगे। इसी प्रकार से युवा प्रतिभा सम्मान, वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान/लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु सदस्य का स्वयं हम सब साथ साथ से पिछले लगातार 5 वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़ा होना या 15 अप्रैल, 2012 तक/या इससे पूर्व इसका आजीवन सदस्य होना ज़रूरी है 7, सम्मान हेतु चयन के समय भेजी गई पुरस्कारों या सम्मानों की सूची के अलावा प्रतिभागी के कला/साहित्यिक योगदान को विशेष तवज्जो दिया जाएगा। केवल सदस्य होने मात्र से ही कोई व्यक्ति किसी सम्मान का पात्र नहीं होगा, उसकी प्रतिभा सर्वोपरि होगी 8, अपनी प्रविश्टि स्वयं भेजने के अलावा पाठकगण किसी अन्य सदस्य की प्रविष्टि को भी नियमानुसार विचारार्थ प्रेषित कर सकते हैं। अंतिम तिथिः प्रविष्टियॉं हम सब साथ साथ के कार्यालय में 15 अप्रैल, 2012 तक पहॅंुच जानी चाहिए।
हम सब साथ साथ पत्रिका का शुल्क दरः एक प्रतिः 15 रु. पत्रिका एवं पत्रिका के कला परिवार सहित शुल्क- वार्षिकः- 150 रु. पॉंच वर्षीयः 650 रु. आजीवनः 1200 रु. (10 वर्ष) संरक्षक सदस्यः 2100 रु. हम सब साथ साथ को विनिमय आधार पर नियमित रूप से अपनी पत्र/पत्रिकायें भेजने वाले संपादकों के लिए पांच वर्षीय शुल्क 350 रु. व आजीवन शुल्क 650 रु.
पताः संयोजक (सम्मान योजना), हम सब साथ साथ पत्रिका, 916- बाबा फरीदपुरी, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली-110008 मो. 9868709348 8447673015 ईमेलः humsabsathsath@gmail.com, hsss2004@indiatimes.com
नोटः 1, प्रतिभागी, सदस्यता क्रमांक सहित अपना पूर्ण विवरण, 2 पासपोर्ट आकार के फोटो, (बाल/वरिश्ठ प्रतिभा व लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु प्राप्त महत्त्वपूर्ण प्रमाणपत्रों आदि की फोटो प्रतियॉं भी संलग्न करें), आयु प्रमाण पत्र एवं अन्य वांछित जानकारी यदि कोई हो, टिकट लगे एवं पते लिखे 2 पोस्टकार्ड, 1 जवाबी लिफाफे के साथ प्रेषित करें 2, सभी चयनित प्रतिभागियों को ख्याति प्राप्त साहित्यकारों, संपादकों एवं कलाकारों आदि की उपस्थिति एवं आतिथ्य में गरिमामयी कार्यक्रम में आमन्त्रित कर उनकी प्रतिभा के अनुरूप आकर्षक स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं पुस्तकें (60 वर्ष से ऊपर की वरिष्ठ प्रतिभाओं को श्री फल, अंग वस्त्र सहित) आदि उपहार स्वरूप प्रदान की जायेंगी 3, कार्यक्रम में भाग लेने वाले बाहरी प्रतिभागियों के आवास, भोजन की सामान्य/घरेलू व्यवस्था प्रतिभागियों के चाहेनुसार हससासा द्वारा की जा सकती है 4, इस पुरस्कार योजना में एक ही श्रेणी में वे प्रतिभागी दोबारा भाग नहीं ले सकेंगे, जो पहले उसी श्रेणी में सम्मानित हो चुके हैं या एक सम्मान पा चुके सदस्य कम से कम 10 वर्ष बाद ही दूसरी श्रेणी का सम्मान पाने के पात्र होंगे 5, उपर्युक्त सम्मान योजना में चयनित प्रतिभागियों को सम्मान समारोह के समय मंच पर अपनी श्रेष्ठ प्रतिभा का प्रदर्शन भी करना होगा 6, बाल प्रतिभा सम्मान योजना के अंतर्गत प्रविष्टियां जिले के किसी प्रमुख व्यक्ति या स्कूल/कालेज/संस्थान के प्रधानाचार्य/ प्रमुख की टिप्पणी के साथ प्रेषित की जा सकती हैं बाल प्रतिभा सम्मान हेतु वही बच्चे पात्र होंगे जो स्वयं या जिनके अभिभावक हम सब साथ साथ पत्रिका परिवार से पिछले लगातार पॉंच वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़े होंगे या 15 अप्रैल, 2012 तक/या इससे पूर्व इसके आजीवन सदस्य होंगे। इसी प्रकार से युवा प्रतिभा सम्मान, वरिष्ठ प्रतिभा सम्मान/लाइफ टाइम अचीवमेंट्स अवार्ड हेतु सदस्य का स्वयं हम सब साथ साथ से पिछले लगातार 5 वर्षों से सदस्य के रूप में जुड़ा होना या 15 अप्रैल, 2012 तक/या इससे पूर्व इसका आजीवन सदस्य होना ज़रूरी है 7, सम्मान हेतु चयन के समय भेजी गई पुरस्कारों या सम्मानों की सूची के अलावा प्रतिभागी के कला/साहित्यिक योगदान को विशेष तवज्जो दिया जाएगा। केवल सदस्य होने मात्र से ही कोई व्यक्ति किसी सम्मान का पात्र नहीं होगा, उसकी प्रतिभा सर्वोपरि होगी 8, अपनी प्रविश्टि स्वयं भेजने के अलावा पाठकगण किसी अन्य सदस्य की प्रविष्टि को भी नियमानुसार विचारार्थ प्रेषित कर सकते हैं। अंतिम तिथिः प्रविष्टियॉं हम सब साथ साथ के कार्यालय में 15 अप्रैल, 2012 तक पहॅंुच जानी चाहिए।
हम सब साथ साथ पत्रिका का शुल्क दरः एक प्रतिः 15 रु. पत्रिका एवं पत्रिका के कला परिवार सहित शुल्क- वार्षिकः- 150 रु. पॉंच वर्षीयः 650 रु. आजीवनः 1200 रु. (10 वर्ष) संरक्षक सदस्यः 2100 रु. हम सब साथ साथ को विनिमय आधार पर नियमित रूप से अपनी पत्र/पत्रिकायें भेजने वाले संपादकों के लिए पांच वर्षीय शुल्क 350 रु. व आजीवन शुल्क 650 रु.
पताः संयोजक (सम्मान योजना), हम सब साथ साथ पत्रिका, 916- बाबा फरीदपुरी, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली-110008 मो. 9868709348 8447673015 ईमेलः humsabsathsath@gmail.com, hsss2004@indiatimes.com
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